नवग्रहों के फलादेश के नियम वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। जन्म कुंडली (Janma Kundli) में ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति के जीवन के हर पहलू — जैसे स्वास्थ्य, धन, विवाह, करियर आदि — पर प्रभाव पड़ता है। यहाँ मैं आपको नवग्रहों के फलादेश के मुख्य नियम (Basic Rules of Planetary Results) सरल भाषा में बता रहा हूँ:
🔯 नवग्रह कौन-कौन से हैं?
1. सूर्य (Sun) – आत्मा, पिता, प्रतिष्ठा
2. चंद्र (Moon) – मन, माता, भावनाएँ
3. मंगल (Mars) – ऊर्जा, भाई, साहस
4. बुध (Mercury) – बुद्धि, वाणी, व्यापार
5. गुरु (Jupiter) – ज्ञान, धर्म, गुरु
6. शुक्र (Venus) – सुख, कला, विवाह
7. शनि (Saturn) – कर्म, विलंब, न्याय
8. राहु – छाया ग्रह, भटकाव, विदेशी चीज़ें
9. केतु – छाया ग्रह, मोक्ष, अलगाव
📜 फलादेश के मूल नियम (Basic Rules for Predicting Results)
🔹 1. ग्रह की स्थिति (House Placement)
ग्रह जिस भाव (house) में बैठा होता है, उस भाव के फल को प्रभावित करता है।
जैसे: मंगल 4th भाव में = घर, माँ, वाहन आदि पर असर।
🔹 2. ग्रह की राशि में स्थिति
ग्रह अगर स्वराशि, मूलत्रिकोण, या उच्च (exalted) में हो, तो शुभ फल देता है।
ग्रह अगर नीच (debilitated) या शत्रु राशि में हो, तो अशुभ फल दे सकता है।
🔹 3. ग्रह का स्वामी और उसकी ताकत
जिस घर में ग्रह बैठा है, उसका स्वामी कौन है और वो कहाँ बैठा है, ये देखना ज़रूरी है।
यदि स्वामी मजबूत है, तो फल अच्छे मिलते हैं।
🔹 4. ग्रह की दृष्टि (Aspect)
कुछ ग्रह विशेष दृष्टि रखते हैं:
मंगल: 4, 7, 8
गुरु: 5, 7, 9
शनि: 3, 7, 10
जिस भाव पर दृष्टि है, वहाँ असर डालते हैं।
🔹 5. ग्रह की युति (Conjunction)
अगर एक से अधिक ग्रह साथ बैठे हों, तो वे एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
शुभ ग्रह साथ हों तो अच्छे फल, अशुभ ग्रह साथ हों तो मिश्रित या बुरे फल।
🔹 6. महादशा और अंतरदशा
विंशोत्तरी दशा प्रणाली के अनुसार, ग्रह की दशा में ही उसका फल पूरी तरह से देखने को मिलता है।
उदाहरण: अगर शनि की महादशा चल रही है, और वह नीच राशि में है, तो जीवन में रुकावटें आ सकती हैं।
🔹 7. गोचर (Transit) का असर
जन्म कुंडली के ग्रह स्थायी होते हैं, पर गोचर के ग्रह (वर्तमान समय के ग्रह) अस्थायी होते हैं।
दोनों के मिलान से भविष्य की घटनाओं की भविष्यवाणी की जाती है।
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🪐 ग्रह विशेष फल (संक्षेप में):
ग्रह शुभ फल अशुभ स्थिति में फल
सूर्य सरकारी सफलता, आत्मबल अहंकार, पिता से दूरी
चंद्र मानसिक शांति, लोकप्रियता मानसिक चिंता, माँ से कष्ट
मंगल साहस, सेना, जमीन झगड़े, दुर्घटना
बुध बुद्धिमत्ता, व्यापार धोखा, वाणी दोष
गुरु ज्ञान, संतान, विवाह अति आदर्श, धोखा
शुक्र कला, ऐश्वर्य, प्रेम वासना, स्वास्थ्य दोष
शनि मेहनत, न्याय, दीर्घायु विलंब, अकेलापन
राहु विदेशी यात्रा, तकनीक भ्रम, अराजकता
केतु मोक्ष, ध्यान अलगाव, कन्फ्यूजन
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📌 निष्कर्ष:
फलादेश एक जटिल प्रक्रिया है — केवल ग्रह की स्थिति देखकर नहीं, बल्कि उसकी दशा, दृष्टि, युति, बल, और गोचर आदि का समग्र विश्लेषण करके ही सटीक भविष्यवाणी की जाती है।
नमस्कार 🙏
ज्योतिषाचार्य – आचार्य पंडित सुजीत तिवारी







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