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ज्योतिष शास्त्र: मानव जीवन की दिशा निर्धारण में इसकी भूमिका और परामर्श की आवश्यकता

रुद्राक्ष वैदिक/ आचार्य सुजीत शांडिल्य : “ज्योतिषं शास्त्राणां चक्षुः” अर्थात् ज्योतिष समस्त शास्त्रों की दृष्टि है। यह केवल ग्रह-नक्षत्रों की गणना नहीं, अपितु जीवन के रहस्यों की सूक्ष्म व्याख्या है। भारतीय परंपरा में ज्योतिष को वैदिक साहित्य का महत्त्वपूर्ण अंग माना गया है, जो न केवल व्यक्ति की जन्मकुंडली के माध्यम से उसके भूत, वर्तमान और भविष्य की जानकारी देता है, बल्कि उसे मानसिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक स्तर पर संतुलन प्राप्त करने की दिशा भी प्रदान करता है।

मानव जीवन में जब अनिश्चितताएं घिरती हैं, जब निर्णय कठिन हो जाते हैं, जब मन दुविधा से ग्रसित होता है तब एक अनुभवी ज्योतिषी की सलाह आशा की एक किरण बनकर सामने आती है। यह परामर्श किसी चमत्कार या अंधविश्वास पर आधारित नहीं होता, बल्कि पंचांग, दशा, गोचर और योग के वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित होता है।

“कालः परमं बलम्” समय ही सबसे बड़ा बल है, और ज्योतिष समय की गति और गुणधर्म का अध्ययन कर, मनुष्य को उचित कर्म एवं निर्णय की प्रेरणा देता है। उदाहरणतः, विवाह, व्यवसाय, शिक्षा, संतान, स्वास्थ्य और यात्रा जैसे जीवन के प्रमुख पड़ावों पर शुभ मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति का ज्ञान, व्यक्ति को दिशा और सुरक्षा दोनों देता है।

ज्योतिषीय परामर्श की आवश्यकता इसीलिए नहीं है कि यह भविष्य को बदल सकता है, बल्कि इसलिए है कि यह वर्तमान को समझने और बेहतर निर्णय लेने का अवसर देता है। जैसे एक कुशल नाविक समुद्र की दिशा, हवा की गति और लहरों की ऊँचाई को देखकर दिशा तय करता है, वैसे ही ज्योतिष भी जीवन की लहरों में संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

कुंडली केवल एक कागज़ पर बने चिह्न नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रतीक हैं। प्रत्येक ग्रह, प्रत्येक भाव और प्रत्येक योग एक विशेष संकेत देता है — चेतावनी, अवसर या बाधा के रूप में। उदाहरण के रूप में यदि मंगल नीच का होकर सप्तम भाव में स्थित है, तो विवाह में बाधा आ सकती है; वहीं, बृहस्पति यदि केंद्र में होकर स्वराशि में है तो धर्म, शिक्षा और सम्मान में वृद्धि संभव है।

आज के भौतिक युग में, जब जीवन की गति तेज है और विकल्प अनंत हैं, तब सही दिशा में सही निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ज्योतिषीय परामर्श यहाँ मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है न केवल ज्योतिषीय घटनाओं के द्वारा, बल्कि व्यक्ति की जन्मपत्रिका के भीतर छिपे संभावनाओं के भंडार को उजागर करके।

“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते” ज्ञान से पवित्र कुछ भी नहीं। ज्योतिष उस ज्ञान का अंग है जो मानव जीवन को संतुलित, सार्थक और सफल बना सकता है। अतः, ज्योतिष केवल भविष्यवाणी नहीं, यह जीवन का दिशासूचक तंत्र है। यह कर्म और भाग्य के बीच सेतु है। सही समय पर लिया गया ज्योतिषीय परामर्श जीवन की दिशा बदल सकता है, संकट को अवसर में परिवर्तित कर सकता है। आवश्यकता है तो केवल श्रद्धा, विवेक और अनुभवी परामर्शदाता की।

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